CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 199

हे ईश्वर तेरे विचार कैसे अमुल्य

he eeshvar tere vichaar kaise amuly

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‘‘हे ईश्वर तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य है ।’’ (भजन 139:17)
हे ईश्वर तेरे विचार कैसे अमुल्य है मेरे लिए,उनकी संख्या का जोड़ मेरे लिए;गिनके बोलूँगा कैसा बड़ा है ।
1.पातालों की रस्सियों से -- चारों ओर जकड़ा हुआ था,और मृत्यु के मजबुत फन्दों से -- मैं उदास हो गया;परमेश्वर से दुहाई दी, मन्दिर से बिनती सुन ली,इसलिए मैं गाऊँगा -- मैं भजूँगा ।
2.जो मेरा विरोध करते है -- और मुझे डराते भी है,जो कहते प्रभु से मैं -- दूर हो चुका भी हूँ;परमेश्वर से दुहाई दी, मन्दिर से बिनती सुन ली,इसलिए मैं गाऊँगा -- मैं भजूँगा ।
3.कहता था तू चरवाहा मेरा -- तेरे अधिकार में न था,पापी था पर पाप न माना -- श्रापीत हो गया था मैं;परमेश्वर से दुहाई दी, मन्दिर से बिनती सुन ली,इसलिए मैं गाऊँगा -- मैं भजूँगा ।
4.छीपी हुई मेरी मुर्खता -- ढ़ाँपा हुआ मेरा गुनाह,मैं तो बहुत अयोग्य हूँ -- और सब कुछ मैं खो बैठा;उघाड़ा पर दण्ड न किया, मुझे तूने न झिड़का,इसलिए मैं गाऊँगा -- मैं भजूँगा ।
5.मुझे जो दुःख हुआ था -- भला मेरे लिए हुआ था,जिससे तेरी विधियों को सीखूं -- तेरे मार्गो में चलूँ;तेरा धर्मशास्त्र मुझको प्यारा, दिन रात है घ्यान उसी पर मेरा;इसलिए मैं गाऊँगा -- मैं भजूँगा ।
6.चाहे पर्वत हट भी जाएँ -- और पहाडियाँ टल भी जाएँ,तौभी मेरी करुणा तुझ से -- कभी वह न हटेगी;धन्य हो तेरे वायदों के लिए, स्वीकार कर इस ध्यान को मेरे;इसलिए मैं गाऊँगा -- मैं भजूंगा ।
7.इस समय जो तुझसे करता हूँ -- तू उसे न जानता है,अन्त में तू इसे जानेगा -- कि है मार्ग यह सिद्ध मेरा;आवाज सुनी मैंने तेरी, और पाया दर्शन तेरा,हल्लेलूयाह गाऊँगा -- मैं भजूँगा ।

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