‘‘जिसने मुझ से प्रेम किया औरमेरे लिए अपने आप को दे दिया ।’’ (गलतियों 2:20)
हे प्रेमी तारणहार, दया तेरी है अपार ।।
1.हानि निन्दा करनेवाला, था भी मैं सतानेवाला;अविश्वासी था भयंकर,(2) पाई दया तेरी मैं अपार ।
2.मेरे बदले तारणहार, दुःख सहा और दण्ड उठाया;तृषित हुआ क्रूस पर चढ़ा,(2) प्रभु प्राण दिया तू ने ।
3.जग में जो डरते तुझ से, रक्षा उनकी करता प्रेम से;तेरी ऐसी जो भलाई,(2) करुँ कैसे मैं बखान ।
4.पुण्य नहीं मेरे जीवन में, चढ़ाऊँ क्या प्रेम के बदले में;धन्यवाद कटोरा लेकर,(2) धरुँ चरणों में तेरे ।
5.मेरे जीवनभर सर्वदा, तेरी करुणा और भलाई;बनी रहती निश्चे साथ साथ,(2) तेरा घर मेरी है आश ।
6.प्रभु प्रिय प्राण पालक, मेरे आत्मा का तू रक्षक;कमी मुझ को कभी न होगी,(2) यह है मेरा नया गीत ।
7.प्रभु लाखों में मेरा अनुपम, दस हजारों में तू उत्तम;हल्लेलूयाह नित्य मैं गाऊँ,(2) सदा प्रफुल्लित होेकर ।