‘‘हे परमेश्वर तेरी करुणा कैसी अनमोल है ।’’ (भजन 36:7)
प्रभु तेरी अनमोल करुणा, नित्य मैं गाऊँगा ।।(2)
1.पीढ़ी-पीढ़ी बतलाऊँगा, अमर है तेरी दया;कलवरी क्रूस पर लोहू बहाकर, वाचा स्थिर किया, पाप-क्षमा है किया ।
2.हर परीक्षा में तू ही मुझ को, भरपूर जय देता;करुणा कर के मुझ को छुड़ाता, विश्वासयोग्य त्राता ।
3.हर दिन नई होती रहती है, तेरी वात्सल्यता;सच्चाई तेरी अति महान है, तू न बदलता ।
4.तेरे आने तक तू मुझ को, निर्दोष रखेगा;विश्वासयोग्य प्रभु तू मेरी, रक्षा करेगा ।
5.अच्छी कुश्ती मैं लडूँगा, विजय पाऊँगा;महिमा मुकुट तुझ से लूंगा, हल्लेलूयाह गाऊँगा ।