CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 207

यीशु की नित्य हम स्तुति करेंगे

yeeshu kee nity ham stuti karenge

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‘‘मैं यहोवा बदलता नहीं ।’’ (मलाकी 3:6)
1.यीशु की नित्य हम स्तुति करेंगे, भूमि, आकाश का जो सिरजनहारा;संकल्प था उसके मन में, ताकि यीशु प्रभु को वह प्रगट करें ।कभी न बदले यीशु, कभी न बदले;चाहे विश्व बदल जाये, वचन न बदले ।
2.जिनको उसने पहले से जाना, उन्हें वह पहले ठहराया भी;धर्मी ठहराकर सुन्दर बनाया, और उनको महिमा भी दी ।
3.हम को अपने रुप में बनाया, पाप का रुप उसने जो हटाया;यीशु के रुप में वह हमको फिर लाया, रखवाली करेगा पुत्र समान ।
4.ईश्वर से प्रेम रखनेवालो को, सारी बातें भलाई की होती;संकट-क्लेश जो इस जग में है, आनेवाली महिमा से कुछ भी नहीं ।
5.क्या कोई क्लेश, संकट, उपद्रव और अकाल, नगाई जो आये;जोखिम, तलवार जो कुछ भी हो, प्रभु के प्रेम से न अलग करें ।
6.मृत्यु और जीवन स्वर्गदूत हो, प्रधानता और चाहे कोई हो;अधिकार, सामर्थ और जो कुछ हो, प्रभु के प्रेम से न अलग करें ।
7.ईश्वर का संकल्प आदि में जो था, ताकि प्रभु को प्रगट वह करें;आओ बचें बुराई से हम, यीशु को हम भी प्रचार करें ।

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