CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 22

हे सेनाओं के यहोवा

he senaon ke yahova

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(भजन 84:1-10)
1.हे सेनाओं के यहोवा, निवास तेरे प्रिय हैं;आँगनों की लालसा मेरे, प्राण को मूर्छित करती है ।सेनाओं के यहोवा ।
2.मेरा तन मन दोनों जीवते, ईश्वर को पुकारे;सेनाओं के यहोवा, राजा मेरे परमेश्वर ।
3.गौरेया बसेरा पाया, शूपाबेंनी धोंसला;प्राण मेरा वेदी पाया, जिस में मुझे तृप्ति है ।
4.क्या ही धन्य हैं वे जो, तेरे भवन में रहते हैं;वे तेरी स्तुति निरन्तर, करते ही रहेंगे ।
5.क्या ही धन्य है मनुष्य जो, तुझ से शक्ति पाता है;वे जिनको सिय्योन की, सड़क की सुधि रहती है ।
6.वे रोने की धाटी को, सोतों का स्थान बनाते;अगली वृष्टि उस में होकर, आशीषें उपजाती है ।
7.वे बल पर बल पाते हुए, सिय्योन की ओर जाते है;हर एक परमेश्वर को वहाँ, मुँह अपना दिखाते हैं ।
8.हे याकूब के परमेश्वर, तू मेरी प्रार्थना सुन ले;हे सेनाओं के परमेश्वर, कान अपना लगा ले ।
9.हे परमेश्वर, ढाल हमारी, हम पर दृष्टि कर ले;अपने अभिषिक्त के मुख पर, दृष्टि भी तू कर ले ।
10.तेरे आँगनों में एक दिन, हजार दिन से उत्तम है;तेरे धर की देवढ़ी पर, खड़ा रहना भावता है ।

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