CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 226

आनन्द, आनन्द, आनन्द है

aanand, aanand, aanand hai

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‘‘वह उछलकर खड़ा हो गया,... और परमेश्वर की स्तुतिकरता हुआ उनके साथ मन्दिर में गया ।’’ (प्रेरितों 3:8)
आनन्द, आनन्द, आनन्द है, आनन्द, आनन्द है ।।
1.मेरा प्रिय यीशु महान उद्धार देने क्रूस पर बलि हुआ है ।
2.मेरा प्रिय यीशु पाप के बिछौने से मुझ को उठाया है ।
3.मेरा प्रिय यीशु अपने लोहू से मुझे प्रेम से धोया है ।
4.मेरा प्रिय यीशु बप्तिस्मा में हमें साथ बन्धाया है ।
5.मेरा प्रिय यीशु धार्मिकता का वस्त्र मुझको पहिनाया है ।
6.मेरा प्रिय यीशु महान उद्धार देता निश्चिन्त क्यों रहूँ मैं ।
7.मेरा प्रिय यीशु स्तुति के योग्य है, हल्लेलूयाह गाऊँगा मैं ।

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