CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 227

तेरे सेव वृक्ष की छाया में मैं

tere sev vrksh kee chhaaya mein main

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‘‘उसकी छाया में हर्षित होकर बैठ गई ।’’(श्रेष्ठ गीत 2:3)
तेरे सेव वृक्ष की छाया में मैं, अब आनन्द से परिपूर्ण हो गया;कीलों से धायल जो हाथ तेरे, उसी प्रेमी हाथ से सम्भाला प्रभु ।।
1.मेरे हृदय के द्वारकों खोलो कहकर,बहुत दिन तू ओस में खड़ा रहा;(2)सिर तेरा बूँदों से भिगा था,(2) मुझे बचाने के लिए धीरज धरा ।
2.हे ! प्रिय मेरे तू अति सुन्दर,गोरा और अति प्रीतम है;दुःखी पुरुष हुआ तू मेरे लिये, मनोहरता अपनी देने के लिए ।
3.तेरे फूल की मधुर सुगन्ध ने,मेरे गन्दे दिल को भर दिया;दाखरस की धाराओं से भी बढ़कर, तेरा प्रेम तो अति स्वादिष्ट है ।
4.पर्वत की चोटी से पार होकर,देखो वह चला आ रहा है;अपने मन के द्वार को खोल कर मैं, अपने प्रिय के लिए बाट जोहूँ ।
5.तेरे भोज के घर में ला करके,राजा और याजकों से मिलाया;जीवन की रोटी मुझे देकर, स्वर्गीय गीतोें को सिखाया प्रभु ।

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