‘‘आज के दिन से मैं तुम को आशीषें देता रहूँगा ।’’(हाग्गै 2:19)
आज के दिन से आशीष मैं दूँगा,जाओं, आशीष में देता रहूँगा;वचन है प्रभु तेरा सच्चा ।।
1.मेरे मन्दिर की पिछली महिमा का,तेज पहिली महिमा से बढ़कर होगा;इस स्थान में मैं शान्ति दूँगा, वचन है अद्भुत प्रभु तेरा ।
2.अन्य-जातियों को कंपकंपाऊँगा, मनभावनी वस्तुएँ ले आऊँगा;चाँदी और सोना, सब कुछ है मेरा, बहुतायत से मैं यह सब दूँगा ।
3.जैसे प्रभु तू आज्ञा दिया था, वैसे ही मन्दिर की नेव डाला;नौवेें महिने के चौविसवें दिन को, लोगों को तू ने वचन दिया ।
4.इब्राहीम तेरी प्रतिज्ञा पाया, आज्ञा का पूरा पालन किया;हेब्रोन में वह डेरा तब डाला, प्रभु यहोवा की वेदी बनाया ।
5.कालेब तेरी आज्ञा अनुसार, सम्पूर्ण मन से चलता रहा;हेब्रोन को उसे मीरास में दिया, आशीष का दाता तू ही हुआ ।
6.दाऊद राजा तेरे पास आया, और नम्र मन से बिनती किया;हेब्रोन को जा, तू ने बताया, महिमा प्रभु तेरी हो सदा ।
7.सभी सिवानों को तू बढ़ाया, प्रेम प्रभु अपना प्रगट किया;अपनी शक्ति को तू है दिखाया, हल्लेलूयाह, यीशु को सदा ।