‘‘जिस ने मुझ से प्रेम किया,और मेरे लिए अपने आप को दे दिया ।’’ (गलतियों 2:20)
यीशु प्रभु तू ने सब कुछ मेरे लिए दिया,प्रेम की खातिर अपने आपको दे दिया ।।
1.सिर दिया तू ने कि काँटों का मुकुट, पहिने मेरे पाप के लिए;वेदना बड़ी थी - सहने से बाहर, प्रेम से यह सब कुछ सहा ।
2.आँखे दी तू ने कि आँसू बहाए, देखकर मेरी दशा को;कैसा दुःख था - तेरे हृदय में, मेरे लिए ही तू रोया ।
3.कोडे खाए तू ने सारे बदन में, मांस तेरा बाहर निकला था;लोहू लूहान था - सारा शरीर भी, हल चलने का दाग हुआ ।
4.हाथ पाँव में तेरे कीलें ठोकी थी, पसली में भाला वह मारा;कैसे बताऊँ - तुझ पर जो हुआ, चुपचाप यह सब तू ने सहा ।
5.कैसा यह प्रायश्चित मेरे लिए हुआ, मुझ को पाप से छुड़ाने को;पाया प्रभु मैं - महान उद्धार को, पश्चाताप के द्वारा यह हुआ ।
6.कैसा अद्भुत यह प्रेम प्रभु तेरा, क्यों मुझ से प्रेम इतना किया ?आभारी मैं हूँ - चरणों में तेरे, अपना मुझे तू बनाया ।
7.योजना जो तेरी मेरे लिए थी, मीरास को मैं प्रभु पाऊँ;सदा मैं तेरे - साथ जो रहूँगा, यह अधिकार तू ने दिया ।