‘‘केवल प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का... ’’ (गलतियों 6:14)
1.जिस क्रूस पर यीशु मरा था, उस क्रूस पर ध्यान जब करता हूँ;संसारी लाभ को माटी-सा, और यश को निन्दा जानता हूँ ।
2.मत फूल जा, मेरे मूरख मन ! इस लोक के सुख और संपत पर;हो ख्रिस्त की मृत्यु से प्रसन्न, और सारी आशा रख उस पर ।
3.देख, उसके सिर, हाथ, पाँव के घाव, यह कैसा दुःख, यह कैसा प्यार!अनूठा है यह प्रेम-स्वभाव, अनूप यह जग का तारणहार ।
4.गर तीनों लोक दे सकता मैं इस प्रेम के योग्य न होता दान;हे यीशु प्रिय आप को मैं समर्पित करता हूँ देह, प्राण ।