‘‘तुम ने जीवन के कर्ता को मार डाला ।’’(प्रेरितो 3:15)
1.कनान देश के एक नगर पास... एक पर्वत खड़ा था;बचाने सभी को वहाँ... ख्रिस्त यीशु मरा था ।
2.बता न सकते हैं वह दुःख... जो उसने सहा था;पर जानते हैं कि हमारे हेतु... वह क्रूस पर टंगा था ।
3.वह मरा कि हम क्षमा पाएँ... और भले बन जाएँ;कि उस रक्त से पा उद्धार... हम अन्त को स्वर्ग जाएँ ।
4.श्रेष्ठ ऐसा कोई नहीं था... कि पाप का ऋण भरें;स्वर्ग द्वार वह केवल खोल सका... कि हम प्रवेश करें ।
5.हाँ उसने किया अत्यंत प्रेम... प्रेम उससे हम रखें;रक्त पर उसके करें विश्वास... और इच्छा पर चलें ।