CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 273

जयवन्त मसीहा, जयवन्त हुआ है

jayavant maseeha, jayavant hua hai

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‘‘हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्त करता है ।’’(1 कुरिन्थियों 15:57)
जयवन्त मसीहा, जयवन्त हुआ है, जयवन्त सदा रहेगा,शैतान के सिर को कुचला उसी ने, राज्य सदा वह करेगा ।।
1.मृत्यु तेरा अब डंक कहाँ है ?कब्र तेरी जय कहाँ रही है ?तोडा प्रभु ने क्रूस की शक्ति से, जयवन्त वह सब में होगा ।
2.यहुदा के गोत्र का सिंह भी वही है,पुस्तक को खोलने जयवन्त हुआ है;सातों मुहरों को तोडनेवाला है, सब बातों में योग्य होगा ।
3.मण्डली का सिर वही जो उसकी देह है,जी उठनेवालों में पहलौठा वह है;मृत्यु को उसने निगल लिया है, प्रधान वह सब का होगा ।
4.सिंहासन के चारों और मेघधनुष्य है,यशब, माणिक, मरकत का सा चमक है;बीच में महान प्रभु विराजमान भी है, जय-जयकार उसका होगा ।
5.चौबीस प्राचीन जिस के आगे झुके हैं,चारों प्राणी सदा आमीन कहते हैं;स्वर्ग में पृथ्वी पर और उसके नीचे, सबका मालिक वह होगा ।
6.ईश्वर की स्तुति हो प्रभु यीशु से,विजय हम को देता अपनी इच्छा से;जयवन्त से बढ़कर हम उसके द्वारा है, सब से अद्भुत वह होगा ।

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