CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 275

ईश्वर की स्तुति हो

eeshvar kee stuti ho

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‘‘परमेश्वर का धन्यवाद करो,जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्त करता है ।’’(1 कुरिन्थियों 15:57)
ईश्वर की स्तुति हो, मृत्यु पर जयवन्त है;प्रभु यीशु ही के द्वारा जयवन्त करता है ,हमें जयवन्त करता है ।।
1.मृत्यु तेरा डंक कहाँ है, ओ कब्र विजय कहाँ ?जय ने मृत्यु को निगल कर वचन पूरा किया है,जय-जयकार, जय-जयकार, जयवन्त हैं, जयवन्त हैं । ... प्रभु
2.ईश्वर से जो जन्मा है वह संसार पर जयवन्त भी है,विश्वास ही के द्वारा हमें, विजय उससे मिलती है ।जय-जयकार, जय-जयकार,...
3.क्या क्लेश, संकट, उपद्रव और अकाल, नंगाई, जोखिम, तलवार,मसीह के प्रेम से अलग भी, कोई न हमें करता है ।जय-जयकार, जय-जयकार,...
4.इन सब बातों में हम उसके द्वारा ही से जयवन्त हैं,जिसने हमसे प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर है ।जय-जयकार, जय-जयकार,...
5.जय जो पाये वही उसके राज्य में वारिस होता है,ईश्वर उसका पिता है और वही उसका पुत्र है ।जय-जयकार, जय-जयकार,...,

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