‘‘परमेश्वर का धन्यवाद हो जो मसीह मेंहमें सदा जय के उत्सव में लिए फिरता है ।’’(2 कुरिन्थियों 2:14)
हे प्रभु तू ही जयवन्त सदा है, जयगीत हम गाते हैं ।
1.पापों के कारण बिगड़े हुए हम, उद्धार हमारा किया है;कृतज्ञता से हृदय भरा है, स्तुति तेरी करते हैं ।
2.अधर्म से भरा जीवन हमारा तुझ ही में स्थिर वह हुआ है,हम पर प्रकाशित हुआ प्रभु तू, सुरज धार्मिकता का है ।
3.अवज्ञाकारी, अज्ञानी हम हैं, आशीषें खोई बहुत हैं;ऐश्वर्य, महिमा, ज्ञान दे के अपना हम पर दया किया है ।
4.शत्रु के फन्दे में, हम जो फंसे थे, निजधन होने चुन लिया है;डर-भय की हालत से हम को छुड़ाया, निर्भय हमें किया है ।
5.युद्ध मेरा है, चुप हो और देखो, छुटकारा दूँगा तुम्हें मैं;ऐसा ही कह के पक्ष में हमारे युद्ध तू ही किया है ।
6.मसीह यीशु में हरेक जगह में विजय के उत्सव में हमें,लिए तू फिरता, सुगन्ध फैलाता, महिमा प्रभु तेरी है ।
7.विश्वासयोग्यता प्रगट तू किया, हम पर कृपा तू किया है;अनाथों का तू घर है बसाया, हल्लेलूयाह हम गाएँगे ।