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SIYON KE GEET · SONG 282

पवित्र सिय्योन के वासी

pavitr siyyon ke vaasee

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‘‘यहोवा जो सिय्योन में विराजमान है, उसका भजन गाओ ।’’ (भजन 9:11)
पवित्र सिय्योन के वासी, सर्वाधिकारी की महिमा है बड़ी;वर्तमान, भूत, भविष्यत् काल-वासी;अल्फा, ओमेगा वही, आदि और अन्त है वही ।।
1.मैंने सब लोगों के सामने वाचा बाँधी है, आश्चर्य कामों की;(2)मैं यहोवा असंख्य आश्चर्य काम करता,(2)समझ से जो बाहर है, (2) यह सब मेरे कार्य हैं ।(2)
2.जय जय कारी गाते हुए सिय्योन नगर में, शान्ति से हम पहुँचे;सदा का आनन्द हमारे दिलों में अब है,शोक और दुःख अब नहीं है, हर्ष, आनन्द, और शान्ति है ।
3.तेरी नेव में मैं नीलम मणि डालूँगा, यशब, पुखराज, मणि;तेरे फाटकों को लालडियों के बनाऊँगा,और मैं सब सिवानों को, रत्नों के बनाऊँगा ।
4.यहोवा ने सुसमाचार सुनाने के लिए, मुझे अभिषेक किया;शोक विलाप का वस्त्र उतारा, यश का वस्त्र दिया;सुन्दर पगड़ी पहनाकर, सेवक अपना बनाया ।
5.जल में होकर जब तू गुजरे बल तेरा हूँगा, संग तेरे रहूँगा;नदियों में जो होकर गुजरे तू न डूबेगा,अग्नि पर जब चलेगा, बाल तेरा न झुलसेगा ।
6.आगे-आगे तेरे चल के पीतल के किवाड़, तेरे आगे तोडूँगा;अन्धकार में छिपा हुआ धन तुझ को दूँगा,गुप्त स्थानों का धन भी, यह सब तुझ को मैं दूँगा ।
7.हे याकुब के घर के लोगों बचे हुए जो, मैंने पाला है तुम को;बूढ़ापे तक सम्भालूँगा सिर सफेद जब हो,तुम को लिए फिरुँगा, छुड़ाता भी रहूँगा ।

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