‘‘यहोवा अकेला ही उसकी अगुवाई करता रहा ।’’(व्यवस्था 32:12)
हे आकाश, कान लगा अब तू... कि मैं बोलूँगा;यहोवा का वंश उसकी प्रजा है सभी,याकूब है उसका निज भाग ।।
1.जंगल में उसने पाया था खोज के,सूनसान और गरजने वाले से भरी हुई मरुभुमि में;लिए फिरा अपने साथ और रक्षा की, आँख की पुतली की नाई ।
2.यहोवा ही ने उनकी अगुवाई की,पृथ्वी के ऊँचे ऊँचे स्थानों पर, सवार भी उसने कराया;और पराया देवता कोई भी उसके साथ, कोई भी उसके साथ न था ।
3.परमेश्वर ने जब याकूब से यह कहा,‘बेतेल जा और वहाँ रहकर, मेरे लिए एक वेदी बना’;तब याकूब ने धर के लोगों से कहाँ, ‘फेंको देवताओं को’ ।
4.दर्शन प्रभु ने बेतेल में फिर दिया,आशीष दे कहा कि तेरा नाम, सदा इस्राएल रहेगा;उसके घर में आनेवालों के लिए ऐसी ही आशीषें है ।
5.प्रभु का आगमन निकट देख कर,एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना न भूलें और न छोड़े;तुम प्रभु के घर की सारी आशीषें, निश्चय जानो, पाओगे ।