‘‘हे मेरे पुत्र, अपना हृदय मुझे दे ।’’ (नीतिवचन 23:26)
तेरे दिल के द्वार पर यीशु खटखटाता,खोलो तुम दरवाजा, वह है आना चाहता ।।
1.बनना चाहता है वह,... हाँ हाँ, तेरा ही मेहमान आज;(2)तेरा रंज ओ फिक्र,... वह उठाना चाहता ।(2)
2.खुशी अपनी देता,... हाँ हाँ, होवे तू प्रतापी;रात दिन तेरे साथ ही,... वह है रहना चाहता ।
3.नम्र आवाज से बोलता,... हाँ हाँ, मुआ वास्ते तेरे;‘छोडो तुम ढिठाई,... खोलो द्वार मैं आता ।’
4.‘तेरे खातिर मैंने,... हाँ हाँ, पहिना ताज कँटीला;तुझ को अब प्रतापी,... ताज हूँ मैं पहिनाता ।’
5.‘बेवफा न हो तू,... हाँ हाँ, मेरे खून खरीदे;कर मेरा इकरार तू,... मुझ से क्यूं शर्माता ।’
6.खोलता हूँ दरवाजा,... हाँ हाँ, दिल का ऐ मसीहा;आ और इस मैं रह तू,... मैं हूँ दिल से चाहता ।
7.यीशु प्यारे कहता,... हाँ हाँ, कीमती वक्त है जाता;वक्त गया जो प्यारो,... वापस फिर नहीं आता ।