CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 31

मेरे आत्मा ! प्रभु को धन्य कह

mere aatma ! prabhu ko dhany kah

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(भजन 103)
मेरे आत्मा ! प्रभु को धन्य कह ! जो कुछ मुझ में है उसके नाम को,धन्य सदा कह, पवित्र वह है, न भूलना उसके उपकार जो है ।।
1.वही तेरे पाप क्षमा करता है, और सब रोगों को चंगा करता है;प्राण को तेरे नाश से बचाकर, दया का मुकुट बान्धता वह है ।
2.पूरब से पश्चिम दूर जितना है, हमारे पाप उतनी दूर किये है;जैसे पिता अपने बच्चों पर करता, वैसे दया उसके डरवैयों पर है ।
3.उत्तम पदार्थ से वह तृप्त करता है, उकाब जैसे जवानी होती है;दुःखी जनों का न्याय करता है, प्रभु दयालु और करुणामय है ।
4.सृष्टि हमारी प्रभु जानता है, मिट्टी हैं हम प्रभु स्मरण रखता है;आयु हमारी फूल के समान जो, पवन लगते ही वह झड़ जाता है ।
5.सिंहासन स्वर्ग में स्थिर उसका है, राज्य प्रभु का सारी सृष्टि पर है;वाचा हम पालते और आज्ञा मानते है, तू ही सदा प्रभु धन्य है ।

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