‘‘इससे बड़ा प्रेम किसी का नहीं ।’’ (यूहन्ना 15:13)
1.प्रेमी मसीह के प्रेम बराबर, प्रेम है कोई नहीं;प्रेम हुआ अवतारण, प्रेम से जान दी अपनी;प्रेम से दी है तसल्ली, (2) प्रेम नगर में बिराजा ।
2.प्रेमी मसीह के प्रेम के लिए, दिल में जगह है नहीं;प्रेम के जो है बैरी, प्रेम से आँख चुरानी;कब लग दूर रहेगा ? सुन्दर समय खोएगा ।
3.होवे कैसा पापी ऐ भाई, प्रेम वह करता तुझे;पापों का भार तू लाकर, चरणों में सीस नवादे;मुक्तिदाता है यीशु, सच है बचाता यीशु ।
4.गफलत में क्यों भुला फिरे है, मुक्ति से ऐसी बड़ी;आज है दिन मुक्ति का, अनुभव करले तू उसका;देन खुदा की यही है, आ इसे तू अपना ले ।
5.संकट में वह साथ भी देता, मित्र है सच्चा वही;दुःख में वही है सम्भाले, जब कोई काम न आवे;यीशु ही मुझको सुहावे, और कोई याद न आवे ।
6.उसके प्रेम का हूँ मैं पुजारी, भक्ति है सच्ची यही;क्रूस का प्रेम लुभावे, दुनिया मुझे न भावे;पीछे मैं उसके चलूँगा, बेड़ा पार लगावे ।