‘‘सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या ?’’( याकूब 4:14)
यह जीवन तेरा दो दिन का है, एक दिन तुझे मिट जाना है ।।
1.पानी के बुन्दके क्षण ही भर में, जैसे बिलकुल मिटते हैं,छाया जैसे पलकों में ढलती, वैसा ही तेरा जीवन है ।
2.धन, सम्पत और खेस कुटुम्ब सब, जो इस जग में तेरे अपने है,व्यर्थ ही है इन सब की माया, सब को यहीं छोड़ जाना है ।
3.क्यों तू भूला है ऐसे जगत में, क्यों जान पापों में खोता है,आ जा पास तू प्यारे यीशु के, जिसने खून बहाया है;जो तुझ को पास बुलाता है ।