‘‘यहाँ हमारा कोई स्थिर रहनेवाला नगर नहीं, वरन्... ।’’(इब्रानियों 13:14)
संसार को छोड़कर जाना पडेगा,सब कुछ यहाँ पर रह जाएगा, रह जाएगा ।।
1.यात्री है हम सब इस दुष्ट जगत में,कुछ न हमारा है बुरे संसार में;न करें धमण्ड और मान-अभिमान, मान-अभिमान;सचेत होकर अब चलना पड़ेगा ।
2.दुःखी, निराशी, वेदना से परिपूर्ण,आँसु बहता जीवन कितना ही बेचैन;भरोसा उस पर और साहस रखें, साहस रखें;दृष्टि मसीह पर रखना पड़ेगा ।
3.जब तक इस जग में हम सब रहेंगे,शैतान से हरदम लड़ते रहेंगे;उसकी युक्तियों को हम जानते हैं, जानते हैं;हिम्मत से आगे बढ़ना पड़ेगा ।
4.पिछली बातों को अब आओ हम भूलकर,दौड़े आनन्द से सब निशाने की ओर;जो भी मार्ग में आए, झेलें मिलकर, झेलें मिलकर;इनाम लेने योग्य होना पड़ेगा ।
5.आपस में झगड़ा, कपट, ईर्ष्या जो है;आओ हम छोड़े, अब प्रेम से सब रहें;निष्कलंक, पवित्र, निर्दोष रहकर, निर्दोष रहकर;सिद्धता को थामे रहना पड़ेगा ।
6.जीवित प्रभु यीशु हम को बचाया,पाप से छुड़ाकर नया जन्म दिया;इसलिए आता है ले जाने को, ले जाने को;अब तो हमें तैयार होना पड़ेगा ।
7.आत्मिक दृष्टि से देखते वह नगर,कितना ही अद्भुत, पवित्र और सुन्दर;पहुँचेंगे शीघ्र ही देर नहीं है, देर नहीं है;आदर से प्रवेश करना पड़ेगा ।