‘‘हम सब का हाल मसीह के न्यायासन केसामने खुल जाएगा... ।’’ (2 कुरिन्थियों 5:10)
न्याय का सिंहासन सामने रखा है,ध्यान से जरा देख कोई बैठा है ।।
1.क्या प्रभु चाहता है कि कोई नाश हो ?धीरज धरता है तेरे लिए वह, अवसर देता वह मन को फिरा ले;नहीं जो नरक दण्ड तेेरे लिए है ।
2.जाँच तू आज अपने को मौका जब मिलता,क्या पाया मुक्ति लोहू में जो है, यदि तू नकारे और मन कठिन हो;याद रख तराजु प्रभु के हाथ में है ।
3.चुप-चुप करके पाप किया है, अन्धकार में भी देखा प्रभु है;बच न सकेगा उसकी आँखो से, न्याय का हंसुआ हाथ में उसके है ।
4.खुलेंगी किताबें सब के लिए है, लिखा जो हुआ है अपने बारे में;न्याय तब करेगा वध हुआ मेम्ना, न्याय का वो सूप प्रभु लिया है ।
5.मसीह में अब जो हैं दण्ड की आज्ञा नहीं, आशीष पाएँगे और आदर भी;सदा प्रभु के साथ वे रहेंगे, जीवन मुकुट देने खड़ा है ।