(भजन 119:72-77)
हजारों रूपयों और मुहरों से भली,(2)तेरी व्यवस्था है मेरे लिये ।।(2)
1.तेरे हाथों से रचा मैं गया हूँ,(2)हाथों से तेरे बनाया गया हूँ,(2)मुझे समझ दे कि आज्ञा को सीखूं ।... हजारों
2.तेरे डरवैये सब होंगे आनन्दित,देख कर वे मुझ को होंगे आनन्दित;मैंने वचन पर है आश लगाई ।
3.हे यहोवा, मैं यह जान भी गया हूँ,कि तेरे नियम सारे धर्ममय है;अपनी सच्चाई से मुझे दुःख दिया ।
4.मुझे अपनी करुणा से शान्ति दे,जैसे ही कि तू ने प्रेम से अपने;दास को अपना वचन तू ने दिया ।
5.तेरी दया जब होवेगी मुझ पर,जीवित रहूँगा मैं तेरे ही बल पर;तेरी व्यवस्था से मैं तो सुखी हूँ ।