(भजन - 122)
जब लोगों ने कहा मैं हुआ प्रसन्न,(2)यहोवा के आओं हम चलें भवन ।।(2)
1.हे यरूशलेम तेरे फाटकों के,(2)भीतर हम आकर के खड़े हो गये ।(2) ... जब
2.यरूशलेम बना ऐसा नगर,सटे हुए जिसके बने सारे घर ।
3.वहाँ गोत्र गोत्र के जाते हैं लोग,यहोवा का धन्यवाद सब करने को ।
4.धरे है वहाँ सिंहासन न्याय के,दाऊद के घराने के सब के लिये ।
5.यरूशलेम की शान्ति का वर माँगो,तेरे प्रेमियों की कुशलता भी हो ।
6.शान्ति हो तेरी शहरपनाह के भीतर,कुशल होवे तेरे महलों के भीतर ।
7.कारण अपने भाइयों और संगियों के,मैं कहूँगा कि तुझ में शान्ति होवे ।
8.अपने यहोवा के भवन के निमित्त,मैं तेरी भलाई का यत्न करूँ भी ।