‘‘उसने हमारे लिए अपना प्राण दिया औरहमें भी भाइयों के लिए प्राण देना चाहिए ।’’(1 यूहन्ना 3:16)
1.जान मैं ने अपनी दी,... खून दिया बेश बहा;कि पावे जिन्दगी,... और मौत से हो रिहा;यह जान, यह जान, यूँ दी तुझे,... क्या देता तू मुझे ?
2.मैं छोड़कर खास जलाल,... जमीन पर आया था;हुआ गरीब तंग हाल,... सदमा उठाया था;यूँ मैंने, मैंने छोड़ा सब,... क्या छोड़ता है तू अब ?
3.मुसीबत बेबयान,... मैं ने गँवारा की;कि बचे तेरी जान,... और पावे मखलसी;यूं दुःख, यूं दुःख में मैं रहा,... क्या तू ने कुछ सहा ?
4.मैं लाया हूँ नजात,... और माफी का इनाम;मैं लाया हूँ नजात,... और सुलह का पैगाम;यह सब कुछ लाया मैं,... अब तू क्या लाया है ।