‘‘मेरा आनन्द तुम में रहे, औरतुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए ।’’ (यूहन्ना 15:11)
आनन्द, महान आनन्द है, प्रभु का वह आनन्द है;हम में बना वह रहता है, स्वर्गीय वह आनन्द है ।।
1.दूतों ने दिया था समाचार, यह कैसा बड़ा आनन्द है;हृदय में उण्ड़ेलता स्वर्ग से प्रभु, जब पापी खेदित होते हैं ।
2.आनन्दित हो कहा प्रभु ने, नाम स्वर्ग में तुम्हारे जो हैं;मेम्ने के जीवन की पुस्तक में, वह नाम लिखा हुआ हैं ।
3.तेरी उपस्थिति में जो है, आनन्द की भरपूरी भी है;इच्छा तेरी जो पूरी करते, आनन्दित सदा रहते है ।
4.माँगो जो प्रभु के नाम से, पाता सब कुछ मसीह से;ताकि आनन्द उनका पूरा हो, प्रभु यीशु ने यह कहा है ।
5.यहोवा के छुड़ाए हुए हैं, सिय्योन में आते विजय से;उनके पास सदा का आनन्द होगा, और हर्ष आनन्द पाते है ।
6.निरादर उसके लिये हैं, निन्दित और शोकित है;आनन्दित वे हैं कहा यीशु नेे, तेरा वचन जिनके मन में हैं ।
7.जब आत्मा बचती हैं जगत में, तब आनन्द बड़ा होता हैं;हर दशाओं में आनन्दित हैं, हम हल्लेलूयाह गाते हैं ।