‘‘हे परमेश्वर, मेरा अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर ।’’ (भजन 51:10)
दिल मेरा ले ले प्यारे यीशु, तूने इसे बनाया है;इस में तू अपना घर बना ले, जिस के लिए बनाया है ।। (2)
1.दुनिया की सब चीजें निकालकर, इसे पाक और साफ कर;(2)गंदगी गुनाहों की तू धोकर, उस खून से जो बहाया है ।(2)
2.बहुत साल मैं रहा तुझ से दूर, लापरवाही ने किया दूर;अनुग्रह, दया और प्रेम की आशीष, धीरज धर मुझे दिखाया है ।
3.जब ध्यान से पढ़ता हूँ वचन, जो राज-मार्ग प्रभु ही का है;मार्ग, सत्य, जीवन अनन्त और विश्वास, आशा उसने बढ़ाई है ।
4.पवित्रात्मा का हो भवन, जीवन की भरपूरी से;हर वक्त हर जगह दूँ गवाही, जैसा उसने सिखाया है ।