‘‘वह उनको मन-चाहे बन्दरस्थान पर पहुँचा देता है ।’’ (भजन 107:30)
तू ही है यीशु मांझी नैया का मोरी,पार करेगा जीवन-नैया तू मोरी ।।
1.गहरा है सागर और आते हैं भंवर,नैया चलाता वह उन से बचाकर;छिपी चट्टाने हैं जल के अन्दर,नैया बचाता वह उन से हटाकर ।
2.आँधियां उठती तो आता मुझे डर,मालूम होता है जीवन पल भर;तब यीशु उन को आज्ञा देकर,बन्ध कर देता है आगे बढ़कर ।
3.निकट अब आता जाता है बन्दर,बढ़ता जाता है विश्वास अन्दर;पहुँचूंगा अपने पिता के मैं घर,स्तुति करूँगा मैं अपने जीवन भर ।