‘‘हे गुरु क्या तुझे चिन्ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते है ?’’(मरकुस 4:38)
नैया पार लगा, मेरी,... नैया पार लगा, यीशुजी;बीच भँवर के हूँ, मेरी,... आप मदद को आ, यीशुजी ।(2)
1.अन्धों को दीनी आँखे तू ने,... कोढ़ी को चंगा किना;(2)तेरे हुकम से फौरन मुर्दे (2),... बाहर कबर से आये ।(2)
2.पानी के मटके, मय बन गये,... आप ने जब फरमाया;पानी पर खुश्की की मानिन्द,... आप ने चल दिखलाया ।
3.पाँच हजार को सेर किया था,... पाँच रोटियाँ लेकर;मुझ पापी की जान बचाई,... जान सलीब पर देकर ।
4.ऐसे काम किये प्रभु यीशु,... जो कोई कर नहीं सकता;तेरे नाम से मरने वाला,... हरगिज नहीं मर सकता ।