‘‘और शमुएल बालक यहोवा केसंग रहता हुआ बढ़ता गया ।’’(1 शमूएल 2:21)
1.यीशु पास मैं आऊँ, खुश वह करेगा;और जब शोकित होऊँ, आनन्द देवेगा ।यीशु पास मैं आऊँ, खुश मैं होऊँगा;प्रेम से वह बुलाता, बालक मुझ जैसा ।।
2.यीशु पास मैं आऊँ, बिनती सुनेगा;दिल से प्यार करेगा, पाप उठाया था ।
3.यीशु पास मैं आऊँ, हाथ मेरा पकड़ के;उत्तम देश को अपने ले चलता मुझे ।
4.हर्षित बालको संग मैं, श्वेत वस्त्र में सज के;त्राता को देखूंगा, स्वर्गीय नगर में