‘‘मेरे पास आओ, मैं तुम्हें विश्राम दूँगा ।’’(मत्ती 11:28)
1.उस मीठी वाणी को मैं सुनता हूँ तेरी,बुलाती पास उस सोते के, जो बहता क्रूस से ही ।आता तेरे पास, आता हूँ मसीह !धोके शुद्ध कर लहु से, जो बहता क्रूस से ही ।।
2.आता अशुद्ध, निर्बल, देख मेरी दशा को;मलिनता से कर मुझे साफ, कि एक भी दाग न हो ।
3.तू पूरा प्यार, विश्वास देता हम को मसीह;पूरी आशा, आराम, शान्ति, इस जग और स्वर्ग में भी ।
4.तू मेरे मन में आ, अपने निज आत्मा से;सब अच्छे गुणों को उपजा और सिद्ध बना मुझे ।
5.तू अपने भक्तों को विश्वास दिलाता है;कि अपनी हर प्रतिज्ञा को तू पूरी करता है ।
6.धन्य पावन लहु को, धन्य हो अनुग्रह हो;हमारे प्यारे यीशु की जय अब सर्वदा हो ।