(भजन 145:1)
हे ईश्वर मेरे राजा, मैं तुझ को सराहूँगा;(2)और तेरे नाम को सदा, मैं धन्य कहता रहूँगा ।।(2)
1.हर रोज तुझ को धन्य कहूँगा, स्तुति मैं तेरी करता रहूँगा ।
2.तेरे कामों का वर्णन करूँगा, भलाई तेरी मैं स्मरण करूँगा ।
3.उद्धार के गीतें मैं तो गाऊँगा, स्तुुति के नारे सदा मारूँगा ।
4.विजय के संगीत जग में सुनाऊँगा, जीवन भर उसको मैं तो भजूँगा ।
5.आशा से भरपूर सदा रहूँगा, अपने प्रभु को आते देखूँगा ।