‘‘हे मेरे परमेश्वर ! मेरे हित के लिये मुझे स्मरण कर ।’’(नहेमायाह 13:31)
ईश्वर तेरे सन्मुख आते,नम्र होके पुकारते हम, हाँ, नम्र होके पुकारते हम ।।
1.अपराधी जो तेरी प्रजा हम, अपराधों को हमारे मिटा;अनुग्रहकारी यीशु प्रभु तू, दया दिखाकर हम को बचा ।
2.कई बार हमने गलती की थी, भूल गए सब तेरी भलाई;धोखे में आकर हम गिर गये, यीशु प्रभु जयवन्त बना ।
3.रीति-नीति में हम फँस गये, और संसार की बातें सुनी;तेरे नियम को हम सब भूले, तेरे वचन से दृढ़ तू बना ।
4.निस्वार्थ तेरे दास जो जग में, और विश्वास में जो जिते है;विश्वास में ही चलने के लिये, सनातन प्रेम से तू भर दे ।
5.संगति में हम को बनाए रखकर, धीरज धरना हम को सिखा;महिमा से भरपूर प्यारे यीशुजी, प्रचार करना हमको सिखा ।