‘‘उसने कहा, मुझे अपना तेज दिखा दे ।’’(निर्गमन 33:18)
1.मैं भूखा हूँ और प्यासा तेरी भरपूरी का,कि तुझ ही को मैं जानूँ ऐ अब्दी खुदा;सब तेरे वायदों पर अब मैं लाता हूँ ईमान,अकेला तू मिटा सकता मेरी भूख तमाम ।बाढ़ के समान, बाढ़ के समान;है खुदा का फजल यीशु में हर आन,वह मेरे लिए है शिफा और दिल सफाई,अबद तक मैं गाऊँगा, ‘‘मसीह की जय ।।’’
2.अब आशीषों के बादल जमा हो जाते है,और यह आसमानी बारिश सब प्यास बुझाती है;अब हम को मालूम हुआ कि क्या है रब्ब के पास,और इसके सम्मुख रह के सदा खुश रहेंगे ।
3.देख अनुग्रह का सागर और यह आसमानी मेह,अब मेरे दिलको भरते आसमानी खुशी से;उद्धार की लहर तोड़ती हर बन्ध जो रोकता है,और दिल से हल्लेलूयाह बराबर गाता मैं ।
4.उद्धार की लहर आती वह आ रही है अब,ऐ मुंजी, हर एक मुल्क में तू उसे अभी भेज;कि लाखो प्राणी उसमें पवित्र हो जाए,और शोकितों को मिल भी शान्ति और विश्राम ।
5.उद्धार की लहर आती बढ़ती रहती है,और मेरा हर एक पाप उसमें दफन होता है;वह मुझको अब उठाती शान्त दिल को करती है,जय यीशु हल्लेलूयाह, क्या अद्भुत आनन्द है ।