‘‘जो रात दिन उसकी दूहाई देते रहेते;और क्या वह उनके विषयमें देर करेगा ।’’(लूका 18:7)
मेरे यीशु करुणा तू कर, तू करुणा का धनी है;दिन और रात मैं तुझ को पुकारूँ बिनती मेरी तू सुन ले ।।
1.मित्र ऐसा तू हमारा जो है दिन रात है बिनती करता,बिनती हमारी कृपा से सुन जो सन्मुख पिता के करते ।
2.जितने हमारे खेस कुटुम्ब सब है नाश वे हो न देखें हम,आँसुओं के साथ प्रार्थना हम करते कृपा कर के तू सुन ।
3.प्रेमी परमेश्वर तू करुणा से योना को निनवे भेजा,उस की प्रार्थना से दया दिखाई, ऐसी प्रार्थना तू सुन ।
4.जितना दुःख तू ने सहा क्या वे सब व्यर्थ ही हो जायेंगे,अंजीर पेड़ पर दया की तू ने, प्रार्थना हमारी तू सुन ।
5.सदोम के न्याय से भक्त को तू कैसा बचाया था,इब्राहीम की प्रार्थना जैसे सुनी थी, वैसे हमारी अब सुन ।