CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 421

हे प्रभु भेज अब तू

he prabhu bhej ab too

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‘‘क्या तू हम को फिर न जिलाएगा ।’’ (भजन 84:6)
हे प्रभु भेज अब तू जागृति,टूटे मन से है यह मेरी बिनती ।।
1.प्रथम प्रेम से हूँ मैं अब गिरा,हो गया ठण्डा प्रेम मुझ में तेरा;भर दे प्रेम अब मुझ में तू अपना ।
2.तू गिरतों को है देता सहारा,जिनका नहीं कोई रहता चारा;घायल हाथों से प्रभु तू उठाता ।
3.शत्रुओं के फंदों में मैं फँस गया,खोल दे प्रभु अब बन्धन मेरा;वापस दे प्रभु आनन्द मेरा ।
4.तेरा और भाइयों का दोषी मैं बना,तुझसे और उनसे मैं चाहता हूँ क्षमा;अपने लोहू से धो दे हृदय अब मेरा ।
5.एकता से रहना प्रभु मैं हूँ चाहता,बैरता को प्रभु जब मुझ से निकालता;शत्रु की शक्ति को प्रभु तब हराता ।
6.गिरी गवाही को प्रभु फिर उठाता,तब जागृति की अग्नि लगाता;भस्म हो जाए जिस से पाप का भूसा ।
7.आत्मिक जागृति का बन जाए सोता,जगत तक जाए तब प्रभाव उसका;हृदयों को कर दे हरा और भरा ।

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