CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 44

ईश्वर की स्तुति, तुम करो

eeshvar kee stuti, tum karo

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(भजन - 147)
ईश्वर की स्तुति, तुम करो, स्तुति गाना है भला ।।
1.यरूशलेम को अब प्रभु... बसा रहा है वेग से,और इकट्ठा कर रहा है... इस्राएली वंश को ।
2.नम्र लोगों को प्रभु... क्षण में चंगा कर रहा,और उनके शोक पर अब... मल्हम पट्टी बाँधता ।
3.तारागण को है प्रभु... ध्यान से अब गिन रहा,और उन में से हर एक का... नाम भी वह दे रहा ।
4.प्रभु अपना है महान... और अति सामर्थी भी,उसकी बुद्धि है अधिक... ज्ञान अपरम्पार भी ।
5.नम्रों को सम्भालता... दुष्टों को है पछाडता,अपने कर्ता-धर्ता को अब... धन्यवाद तुम करो ।
6.मेधों से आकाश को... हे यहोवा लादता,और पृथ्वी के लिए वह... भारी वर्षा भेजता ।
7.घास पशुओं के लिए... पर्वत पर उपजा रहा,आहार बच्चों के लिये वह... कौवों को भी दे रहा ।
8.न तो बल भी घोड़ों का... न मनुष्य का चाहता,होता है प्रसन्न उनसे... भय जो उसका मानते ।
9.यरूशलेम यहोवा की... सिय्योन अपने राजा की,स्तुति प्रशंसा करो... एक हो कर के सभी ।
10.तेरे लडके-बालों पर... है यहोवा की आशीष,और तेरे फाटकों के... खम्भों को दृढ़ करता है ।
11.शान्ति देता है प्रभु... तेरे सिवानों में सदा,तृप्त करता है सदा... उत्तम उत्तम गेहूँ से ।
12.वचन दिया याकूब को... विधियाँ इस्राएल को,न किया व्यवहार ऐसा... अन्य जातियों से कभी ।

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