‘‘मैं यह प्रार्थना करता हूँ, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञानऔर सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए ।’’(फिलिप्पियों 1:9)
1.इस से गहरा यीशु तेरे प्यार में, जाना चाहता हूँ;मदद दे कि तेरे ज्ञान के स्कूल में, उन्नति करूँ ।हाँ, इस से गहरा अब, और इस से ऊँचा भी;मुझे चला ऐ रब्ब, यही दुआ है मेरी ।।
2.इस से गहरा, आत्मा से तू भर के,... खींच, हाँ, खींच मुझे;ताकि मेरी जिन्दगी मसीह में,... बिलकुल छीप जाएँ ।
3.इस से गहरा, शायद वह मुझे होगा,... दुःखो में जब हूँ;ताकि उसके प्यार में स्थिर मैं होकर,... उसको फल देऊँ ।
4.इस से गहरा रोज-ब-रोज मसीह में,... उसकी इच्छा में;मेरी जिन्दगी, तभी बदलेगी,... उसकी सूरत में