CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 455

मण्डली एक ही है

mandalee ek hee hai

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‘‘जो मुझ पर... विश्वास करेंगे... वे सब एक हो ।’’(यूहन्ना 17:20)
मण्डली एक ही है,सार्वत्रिक, सार्वत्रिक मण्डली कहलाये;मण्डली एक ही है,सिर एक ही है, शरीर एक ही है;नित्य शक्तियुक्त यह है, मण्डली एक ही है ।।
1.बनी नहीं किसी आदमी के नाम पर ये,और न स्थापित किसी सिद्धान्तों पर है;जगह के नाम से, न दिन के आधार पर;बनी नहीं किसी ऐसे नाम पर यह ।
2.न कोई यहूदी, न कोई यूनानी;न खतना है और न खतनारहित ही,न देशवासी है और न परदेशी;स्वतन्त्र-दास, स्त्री-पुरुष भेद नहीं है ।
3.बन्धन है आत्मा का सात धागों का,आत्मिक जीवन है धागा मण्डली का;दुनिया में रहकर, दुनिया से न्यारी;स्वर्गीय जीवन बितानेवाली है ।
4.मण्डली देह है, देह है मण्डली;दिव्य-दृष्टांत है वचन में बहुत ही,निवासस्थान और प्रभु का घर है यह;नूतन मनुष्य और राजनगर है ।
5.जैसे नेव होती है आधार भवन का,जैसे दाखलता से जुड़ती है शाखा;मानव-शरीर में जैसे सिर होता है,पति हो स्त्री का, ख्रिस्त वैसे मण्डली का है ।
6.सार्वत्रिक मण्डली को, देख न सकता है;शैतान है परेशान इस के कारण से,स्थानिक मण्डली द्वारा, प्रगट होती है;सार्वत्रिक मण्डली मर्म प्रभु का यह ।
7.नया जन्म पाये वे ही यह मण्डली है,यीशु ख्रिस्त अनोखा मण्डली का सिर है;योग्यता से करें पाँचों सेवाएँ,मिलकर हम प्रभु को हल्लेलूयाह गाएँ ।

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