‘‘तुम ईश्वर का निवास-स्थान होने के लिए एक साथबनाये जाते हो ।’’ (इफिसियों 2:12)
हम ईश्वर के घर की नाई बनाये गये हैं,उस के अनुग्रह से हम स्थिर भी हुये है ।।
1.लोहू बहाया यीशु ने मण्डली हम बने,वन्दना करते हम उसकी यीशु प्रभु है ।
2.सन्तों की संगत मिली और स्वर्ग भी मिला है,पूरे दिल से भक्ति करते वही योग्य है ।
3.परदेशी जो थे हम जग में घर वह लाया है,भक्तों के पालनहार की हम स्तुति करते हैं ।
4.प्रभु अपना कार्य किया हम सेवक बने हैं,नम्र बनकर दीनताई से स्तुति करते हैं ।
5.प्रभु यीशु सिर मण्डली का शिरोमणि है,जय-जयकार सदा हो उसकी नारे मारते हैं ।