‘‘यहोवा का तेज यहोवा के भवन में भर गया था ।’’( 2 इतिहास 7:2)
प्रभु की महिमा प्रभु के घर को,भर दिया वह भर दिया ।।
1.पाप और अधर्म के कारण जो सब ही,ईश्वर की महिमा से रहित हुये;ताकि फिर महिमा मनुष्य को मिले,प्रभु यीशु ने प्रायश्चित किया ।
2.अनुग्रह सच्चाई से परिपूर्ण होकर,हमारे बीच में डेरा किया;जैसे पिता के एकलौते की,हम ने देखी उस की महिमा ।3.इसलिए प्रभु एक घर है बनाता,
बहुमूल्य जीवते पत्थरों के द्वारा;उसका ही नमुना और संकल्प से,ताकि भरे उस में उस की महिमा ।
4.शान्ति का राजा घर जब बनाता,मनुष्य का गड़बड़ उस में न हो;मूल्य के द्वारा स्थान वह खरीदा,पसन्द जो उस ने खुद ही किया ।
5.पूरी अलायदगी में घर को बनाता,आत्मिक ऊँचाई पर नेव डाली;उद्धार और स्वर्गीय-जीवन साक्षी के,द्वारा प्रभु ने सब कुछ किया ।
6.प्रभु यीशु आज सिंहासन-आरुढ़,शैतान को पाँव तले कर दिया;जयवन्त वह होकर पूरे विभव में,घर को ज्योति से भर दिया ।
7.घर जब उस का बन जाता है,आग ऊपर से गिरती है;सारी मलिनता को भस्म वह कर के,घर को महिमा से भर दिया ।