CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 465

हे सिय्योन नगर तू

he siyyon nagar too

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‘‘हे सिय्योन, बहुत ही मगन हो ।’’ (जकर्याह 9:9)
1.हे सिय्योन नगर तू सोने का नगर है,महिमित नगर तेरा बड़ा भाग्य है;बहुत ही सुन्दर तू राजा का नगर है ।
2.सिय्योन के उत्तम लोग, सोने के समान है;उन की शोभा बहुमोल पत्थर सी है,उन का तेज चमकीले मणि से अधिक है ।
3.प्रभु ने तुझे चाहा और प्रेम भी किया है,महासामर्थी तुझे स्थिर किया है;सनातन निवास-स्थान तुझे बनाया है ।
4.माता भी भूलती है अपने बच्चों को,पर तुझ को मैं कभी न भूलूंगा;तेरा चित्र मेरी हथेली पर है ।
5.हे सिय्योन ! डरता क्यूं, अपना बल धारण कर;एक संग उमंग से तू जय-जयकार कर,आया प्रभु तुझ में, वास करेगा वह ।
6.दुल्हिन को देखकर दूल्हा हर्षित होता है,वैसे ही परमेश्वर तुझे देखकर भी;हे सिय्योन तुझ से प्रभु प्रसन्न होगा ।
7.सिय्योन के शत्रु सब लज्जित होवेंगे,सतानेवाले जो बैरी सब हैं;तेरे चरणों में आकर वे गिरेंगे ।
8.जब तक तेरी धार्मिकता, प्रकाश की नाई;उद्धार तेरा जलते दिपक समान,न दिखाई दे मैं चुप न रहूँगा ।

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