‘‘फिर मैंने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर सेपरमेश्वर के पास से उतरते देखा ।’’(प्रकाशित 21:1-7)
पवित्र नगर नये यरुशलेम को, स्वर्ग पर से उतरते हम ने देखा;पति के लिये सिंगारी हुई जो, दुल्हिन समान हम ने उस को देखा ।।
1.सिंहासन में से कोई ऊँचे शब्द से, कह रहा था बड़े सामर्थ से;ईश्वर का डेरा मनुष्यों में है, वह उन के साथ सदा वास करेगा ।
2.परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा, वे उस के लोग और ईश्वर वह होगा;आँसु आँखों से वह सब पोंछेगा, इस के बाद मृत्यु न शोक दुःख होगा ।
3.पहली बातें अब तो जाती रही, परखो देखो वे सब नयी हुई;सिंहासन पर से प्रभु ने कहा, निहारो मैं सब कुछ नया किया ।
4.ये वचन विश्वास के योग्य जो ठहरा, सत्य और न मिटनेवाला खरा;आदि और अन्त, अल्फा-ओमिगा, प्यासे को जीवन का सोता देगा ।
5.जय जो पाये वही इन वस्तुओं का, वारिस होगा पवित्र नगर का;प्रभु उस का ईश्वर पिता होगा, पुत्र वह होवेगा परमेश्वर का ।