‘‘मैं... अपनी कलीसिया बनाऊँगा ।’’ (मत्ती 16:18)शक्तिशाली, राजा शालेम का, गुलाब शारोन का;महिमा हो नित्य यीशु को ।।
1.पूर्वकाल में जो वचन, दिये प्रभु तू ने;शान और सामर्थ्य से पूरे किये तू ने, पूरे किये तू ने;पूर्वकाल के जो दर्शन सारे पूरे किये,प्रभु यीशु तेरे समान और कोई नहीं, और कोई नहीं है ।
2.पर्वत पर जैसे तू ने, दिखाया था नमूना;वैसी ही सामर्थ्य से, निवासस्थान बना;निवासस्थान बनाया दास मूसा द्वारा;महिमा से उसे भरा, तेरा प्रताप सारा ।
3.शालेम-यरूशलेम में जो मन्दिर बना,सुलेमान को भी उसका, दिया था तू नमूना;मन्दिर तू ने, अपने लिये, बनवाया पूरामहिमा से उसे भरा, तेरा प्रताप सारा ।
4.समय जब पूरा हुआ प्रभु यीशु आया,कुंवारी के द्वारा प्रभु, जन्म तू ने लिया;बनाऊँगा मण्डली मैं, प्रभु तू ने कहा;मण्डली में लाके हमें मन्दिर तू बनाया ।
5.हाथ से बनाये हुये, घर में तू न रहा;आश्चर्य तू हमारे, मघ्य में रहना चाहा;तेजोमय प्रभु अपनी प्रजा को बुलाया,महिमा अपनी उन्हें देने, संकल्प तू किया ।
6.एक इधर से एक उधर से सब को तू ने चुन लिया,अद्भुत रीति चुन के उन्हें एक तू ने किया;नूतन दम्पति को, तू ही आशीष अपनी देता;रक्षा उनकी कर के उन्हें तू ही है बढ़ाता ।
7.व्यक्तियों को परिवारो में तू ही है बदलता,शक्तिमान मण्डली को, दुल्हन सा बनाता;अद्भुत ऐसी दुल्हन का तू दूल्हा खुद ही बनता,अन्त नहीं प्रभु तेरे, महिमित राज्य का ।