(भजन 116; भजन 65)
मेरे पापों की क्षमा तू ने की, प्रभु मेरी आँखें तू ने खोल दी;प्रभु यीशु ने प्यार है किया, मेरे लिए प्राण है दिया ।।
1.वस्त्र मलीन है निकट आता हूँ, (2) गन्दा हृदय है तुझ को पुकारूँ,कलवरी क्रूस पास आया । प्रभु...
2.मृत्यु से तू ने मेरे जीवन को, आँसुओं से मेरी आँखों को,मेरे पिता ने बचाया ।
3.मेरे जीवन के पूरे समय तक, हर दिन तुझ को प्रभु मैं पुकारूँ;बिनती मेरी तू सुनेगा ।
4.हेे यहोवा तू अति दयालु, धर्मी है न्यायी परमेश्वर;नम्र जनों को सम्भालता ।
5.मैं मन्दिर के आँगनों में, यरुशलेम ! मैं तेरे मध्य में;तेरी स्तुति करूँगा ।
6.प्रभु ने मुझ को मीरास बनाया, महिमा मुझ से प्रगट कराया;प्रेम से हे वह बुलाया ।