‘‘प्रेम... सिद्धता का बन्ध है ।’’ (कुलुस्सियों 3:14)
प्रेम, प्रेम(2)प्रेम है मेरे दिल में,आनन्द ही आनन्द है ।।(2)
1.एक दिन तेरा दर्शन पाया,... आपे को अपने मैं ने नकारा;तेरी दया है बड़ी, यीशुजी,... तेरी दया है बड़ी ।
2.स्वर्ग में सब का प्यारा तू है,... मुझ नीच से प्यार किया क्यों ?क्या कभी तेरे प्रेम को,... हे प्रभु मैं समझूँ ।
3.तेरे बिना मैं भटक गया था,... मैं अभागा आवारा बना था;अपनाया तू ने, यीशुजी,... अपनाया तू ने ।
4.इस संसार की माया सारी,... घास के फूल की नाई है झड़ती;लेकिन तू है अटल, यीशुजी,... लेकिन तू है अटल ।