‘‘सब खाकर तृप्त हो गए ।’’ ( मत्ती 14:20)
अरमान मेरा मिट गया है, प्यारे यीशु में,मिटता ही जा रहा है, मेरे प्यारे यीशु में ।।
1.जब दुनिया को मैं देखता कुड़ा समान वह है,दिल मेरा दौड़ा जाता है, प्रभु को पाने में ।
2.भूखा जब मैं होता हूँ मिटती है भूख मेरी,खुब तृप्ति मुझ को देता, सब शान्ति उसी में ।
3.प्यासा मैं जब होता हूँ देता जीवन पानी,जीवन को नदी बनाया, बढ़ता हूँ उसी में ।
4.शक्ति जब मेरी घटती सामर्थ है वह मेरी,जय उस ने मुझ को दी है, बल पाता हूँ उसी में ।
5.जय उस से मैं ने पाई और सब मीरास भी,खुदा का बेटा बनकर, आनन्द है उसी में ।
6.दर्शन वह मुझे देता, ज्योति है आत्मिकी,कीमती मैं उस नगर को, देखता हूँ उसी में