‘‘मैं उस लोहू को देखकर तुम को छोड़ जाऊँगा ।’’(निर्गमन 12:13)
संकट और दुःख क्लेश मेरा मिट गया है,वह नाशकारी दूत मुझ से पार गया है ।।
1.उस मेम्ने के बहुमूल्य लोहू के द्वारा,अब मैं छिप गया, जो मेरा उद्धार है ।
2.अब मैं फिरौन का गुलाम नहीं हूँ,न तो मैं सिय्योन का पराया ही हूँ ।
3.मारा जो मेरा था वह मीठा बना है,चट्टान से बहा पानी, पीना बना है ।
4.सुन्दरता से भरा स्वर्गीय कनान है,मीरास सनातन की, वह मेरी है ।
5.आनन्द ही आनन्द महा आनन्द है,कनान का जीवन जो, मुझे सानन्द है ।
6.मरुभूमि में वही मेरा प्रभु है,मन्ना जो देता प्रभु, वही काफी है ।
7.प्रभु यीशु मेरा ही बल और गीत है,वही मेरा उद्धार है, हल्लेलूयाह ।