‘‘मैं युगानुयुग जीवित हूँ ।’’ ( प्रकाशित 1:18)
जीवित है, यीशु जीवित है,हृदय में मेरे वह जीवित है;संकट में मेरे साथ वह रहता है,जीवित है वह सदा काल ।।
1.लाल समुद्र को उस ने चीरा है,यरीहो की दिवालों को ढ़ा दिया है;अन्धों की आँखों को उसने खोला है,कोढ़ियों को भी उसने चंगा किया है ।
2.मुझ को न छोड़ तू सम्भाल ले, प्रभु;मैं तेरे पीछे-पीछे चलूँगा, प्रभु;मरते समय मुझे स्वर्ग में तू ले,महिमा अपनी दिखा दे, प्रभु ।