‘‘वे आगे को अपने लिए न जीएँ, परन्तु उस के लिए...’’(2 कुरिन्थियों 5:15)
प्रभु में तेरा हूँ, मसीह मैं तेरा हूँ;और तेरा ही सदा रहूँगा,तेरे लिए अब प्रभु बाकी जीवन मैं जीऊँगा ।।(2)
1.देखा है जग को प्रभु, धोखा और निराशा यहाँ;(2)दिखाया तू ने मुझे है वह शान्ति आशा वहाँ,(2)आभारी हूँ मैं प्रभु (2), अब न दृष्टि मैं फेरूँगा;रहूँगा तुझ में सदा आज्ञा तेरी मैं मानूँगा ।
2.चलूँगा पीछे तेरे क्योंकि आगे तू जो चला,तू ही जो साथ अब मेरे शोक और दुःख को सब भूलूँगा;तसल्ली तुझ सेे पाता, आँसु अब न बहाऊँगा;तू ही जो सब कुछ मेरा तुझी से में बल पाऊँगा ।
3.दृष्टि है क्रूस के ऊपर जयवन्त प्रभु मैं बनूँगा,जो कुछ भी मार्ग में आए आनन्द से मैं सब सहूँगा;भरोसा तुझ पर मेरा, हर्ष से मैं आगे बढूँगा;पंखो में मुझ को छिपा अब किसी से न डरूँगा ।
4.मृत्यु नदी के निकट आनन्द से जब में आऊँगा,प्रभु तब मृत्यु से जीवन के अन्दर ले जाएगा;देखूँगा त्राता को, तब स्वागत मेरा वह करेगा;क्षण भर में मैं प्रभु के रुप में बदल जाऊँगा ।
5.अगम्य ज्योति में तब विजय से प्रवेश करूँगा,पवित्र जनों से और सब दूतों से तब जा मिलूँगा;सदा का आनन्द होगा, साथ प्रभु के मैं रहूँगा;यही है आशा मेेेरी प्रभु को तब मैं पाऊँगा ।